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Chef Review: लजीज खाने की भूख और इमोशन का कॉकटेल

Updated: Oct 06, 2017 11:51 am
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शेफ मूवी रिव्‍यू

शेफ

रेटिंग:

3.5/5

कास्‍ट:

सैफ अली खान, पद्मप्रिया जानकिरमन, स्वर कांबले, चंदन रॉय सान्याल, शोभ‍िता धूलिपाला

डायरेक्‍टर:

राजा कृष्‍णा मेनन

समय:

2 घंटे 13 मिनट

जॉनर:

ड्रामा

लैंग्‍वेज:

हिंदी

समीक्षक:

मीणा अय्यर

1/9कहानी

रोशन कालरा (सैफ अली खान) एक थ्री-स्टार मिशलिन शेफ है। न्‍यूयॉर्क के एक रस्‍त्रां में काम करता है। लेकिन एक दिन वह अपने कस्‍टमर से बदतमीजी करता है। यहां तक कि ग्राहक को घूसा मार देता है। फिर क्‍या नौकरी से निकाल दिया जाता है। अब नौकरी नहीं है, तो मजबूरी में भारत लौटना पड़ता है। पड़ाव है कोच्च‍ि, अपने बेटे अरमान (स्वर) और अलग हो चुकी पत्नी राधा मेनन (पद्मप्रिया) के पास।

2/9जिंदगी का सफर, है ये कैसा सफर…

Chef Movie Review in Hindi

रोशन के लिए यह एक ट्रिप होता है। ब्रेक जैसा कुछ। उसे वापस लौटना है। अच्‍छा खाना पकाना है, लेकिन जिंदगी ने कुछ और ही सोच रखा है। बेटे का साथ अच्‍छा लगने लगता है। बिखरे पर‍िवार को एक होना है। रोशन को अपनी कमियों और ताकत का एहसास होता है। पत्नी की सलाह के बाद एक नई शुरुआत होती है ‘रास्‍ता कैफे’ के रूप में। यह एक फूड ट्रक है। ट्रक रफ्तार पकड़ती है और जिंदगी भी नए मोड़ पर आकर ठहरती है।

3/9समीक्षा

Chef Movie Review in Hindi

साल 2014 में हॉलिवुड डायरेक्‍टर जॉन फैवरो ने ‘शेफ’ नाम से एक फिल्‍म बनाई थी। बॉलीवुड डायरेक्‍टर राजा कृष्‍णा मेनन ने उसी से प्रेरणा ली और सैफ के साथ ‘शेफ’ लेकर आए हैं। फिल्‍म एक सफर की तरह है। फिल्‍म दो स्तर पर काम करती है। यह दर्शकों को जिंदगी के सफर पर ले जाती है। हकीकत से रूबरू करवाती है। दूसरी ये कि भले ही आपको खाने-पीने का शौक ना हो, लेकिन यह आपको ललचाती है। रोशन को खाना पकाते और खाने के बारे में कहते-सुनते देख मन और पेट में कुछ-कुछ होता है, जो जीभ पर आकर बूंदों का रूप ले लेती है।

4/9अच्‍छा खाना और जिंदगी की सीख

Chef Movie Review in Hindi

फिल्‍म में ‘अच्‍छा खाना’ और ‘जिंदगी की सीख’ दोनों साथ-साथ चलती है। सैफ को शेफ के रूप में खाने पकाते देख, आपका मन भी ऐप्रन, चाकू और दूसरी चीजें लेकर सीधे किचन में जाने का करने लगता है। उन्‍हें खाने के साथ एक्‍सपेरिमेंट करते देखना या टमाटर की चटनी का बारीकी से जिक्र करते हुए सुनना, लार का टपकाने के ल‍िए पर्याप्‍त है। फिल्‍म खत्‍म होते-होते आपको कुछ अच्‍छा खाने का मन तो करने ही लगता है।

5/9रिश्‍ते हमें मजबूत बनाते हैं, कमजोर नहीं

Chef Movie Review in Hindi

खैर, फिल्म एक इमोशनल जर्नी है। यहां एक बाप है, जो अपने बेटे से माफी मांगता है कि वो उससे दूर रहा और गलतियों पर डांट लगाने के लिए उसके पास नहीं था। फिल्‍म बताती है कि भले ही हम विचारों से अलग हों। बोली और पसंद-नापसंद अलग हों, रिश्‍ते हमें ना सिर्फ जोड़ते हैं बल्‍क‍ि मजबूत बनाते हैं। अपनों के साथ होने का एहसास सबसे बड़ा धन है।

6/9पैरेंटिंग के लिए जरूरी है सहयोग

Chef Movie Review in Hindi

‘शेफ’ को-पैरेंटिंग पर भी ध्‍यान खींचती है। बच्चे के पालन-पोषण में मां और बाप दोनों के जिम्‍मेदारी है और यह आपसी सहयोग के बिना अधूरा है। तेजी से बदल रहे शहरी परिवेश और भागदौड़ में पीछे छूट रहे अपनों के बीच यह एक अहम जरूरत बन गई है।

7/9सैफ के कंधों पर टिकी है ‘शेफ’

Chef Movie Review in Hindi

इसमें कोई दोराय नहीं है कि ‘शेफ’ पूरी तरह सैफ के कंधों पर टिकी है। सैफ अच्‍छे लगते हैं। बात केयरिंग पिता की हो या एक्‍स हसबैंड की। पूर्व पत्‍नी के प्रेमी से चिढ़ की बात हो या खाना बनाने के अपने शौक को जीने की, वह जंचते हैं। पद्मप्रिया आकर्ष‍ित करती हैं। हालांकि कहीं-कहीं वो थोड़ी ओवर भी लगी हैं। छोटे बच्‍चे के रूप में स्वर प्‍यारे लगे हैं। सैफ के बाद वो फिल्‍म की सबसे अहम कड़ी हैं। शोभिता धुलिपाला (विनी) ने भी शानदार काम किया है जो कि रोशन की को-वर्कर और फ्रेंड है।

8/9धीमी रफ्तार खत्‍म कर सकती है भूख

Chef Movie Review in Hindi

फिल्‍म में मिलिंद सोमन भी हैं। वह पद्मप्रिया के बॉयफ्रेंड के रोल में हैं। उन्‍हें पर्दे पर देखना अच्‍छा लगता है। यह फिल्म आपको एक ‘फन रोड ट्रिप’ पर ले जाएगी। खाने और फैमिली पर फोकस है, लिहाजा अपनों के साथ फिल्‍म को देखना अच्‍छा अनुभव देगा। रितेश शाह के डायलॉग स्मार्ट और हाजिर जवाब हैं। फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी है। यह ठीक वैसे ही है जैसे किसी रेस्‍त्रां में आप भूखे पेट अच्‍छे खाने का इंतजार करते हैं। हालांकि इंतजार के बाद जब तक खाना परोसा जाता है, भूख मिट चुकी होती है।

9/9फील गुड वाली फीलिंग

Chef Movie Review in Hindi

‘शेफ’ की कहानी में कुछ नया नहीं है। लेकिन आप इसके सफर का आनंद लेंगे। फील गुड वाली फी‍लिंग है। खास बात ये भी है कि फिल्‍म में कुछ भी निगेटिव फीलिंग नहीं है। ना कोई डायलॉग, ना कोई कैरेक्‍टर। सब अच्‍छा-अच्‍छा। पॉपकॉर्न, पास्‍ता, पिज्‍जा पराठा जैसे चीज रोशन मिनटों में बना लेता है। थोड़े पैसे ज्‍यादा लेकर सिनेमाघर जाएं, क्‍योंकि भूख लगेगी इसकी गारंटी है।