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Hichki Review: दमदार कहानी और रानी की जबरदस्‍त एक्‍ट‍िंग

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हिचकी फिल्‍म रिव्‍यु

हिचकी

रेटिंग:

3.5/5

कास्‍ट:

रानी मुखर्जी, आसिफ बसरा, कुणाल श‍िंदे

डायरेक्‍टर:

सिद्धार्थ पी. मल्‍होत्रा

समय:

2 घंटे 20 मिनट

जॉनर:

ड्रामा

लैंग्‍वेज:

हिंदी

समीक्षक:

रचित गुप्‍ता

1/9कहानी

नैना माथुर (रानी मुखर्जी) एक महत्वाकांक्षी शिक्षक हैं, जो टॉरेट सिंड्रोम से ग्रस्त हैं। कई इंटरव्‍यू और ढेर सारे रिजेक्‍शन के बाद नैना को एक स्‍कूल में फुल टाइम टीचर की नौकरी मिलती है। यह एक एलिट यानी समाज के उच्‍च वर्ग वाला स्‍कूल है। इसमें नैना को जिस क्‍लास का जिम्‍मा सौंपा जाता है, वो उग्र स्‍वभाव वाले नटखट बच्‍चों का है। वो बच्‍चे जो गरीबी में जिंदगी बसर कर रहे हैं और आरक्षण योजना के तहत इस बड़े स्‍कूल में भविष्‍य संवारने के लिए पहुंचे हैं। नैना के सामने अब चुनौतियों का अंबार है। वो खुद की कमियों से लड़ते हुए बच्‍चों को सुनहरे भविष्‍य की ओर ले जाती है।

2/9समीक्षा

Hichki Movie Review in Hindi

एक श‍िक्षक ना सिर्फ आपका मेंटॉर हो सकता है, बल्‍क‍ि वह आपका मार्गदर्शक और दोस्‍त भी बन सकता है। ‘हिचकी’ ऐसे ही एक श‍िक्षक की कहानी है। हालांकि, टॉरेट सिंड्रोम नैना माथुर को दूसरे श‍िक्षकों से अलग बनाती है। न्‍यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर के कारण नैना को हिचकी आती है। इस वजह से वह अलग तरीके की आवाज निकालती है, लेकिन इसे उत्‍साह के साथ बताती भी है।

3/9बाधाओं से लड़ने की दास्‍तान

Hichki Movie Review in Hindi

नैना माथुर बाधाओं से लड़ती है- उसकी अपनी परेशानी है, हिचकी भरी बोली के साथ-साथ उसके सामने 14 बदमाश बच्‍चों की क्‍लास है, जो हर मोड़ पर उसका मजाक बनाते हैं। ये बच्चे शिक्षा के अधिकार पहल का हिस्सा हैं और उसी को आधार बनाकर एक अभिजात वर्ग के स्कूल दाखिला पाते हैं। स्‍कूल में ज्यादातर बच्चों और शिक्षकों के पास ‘हाई क्‍लास’ सोसाइटी की आवाज है। ऐसे में कोई भी नैना और उसके छात्रों को सफल होने का मौका नहीं देना चाहता। लेकिन वह डटी रहती है।

4/9कहानी में नयापन, लेकिन स्‍क्रीनप्‍ले कमजोर

Hichki Movie Review in Hindi

फिल्‍म की कहानी और कॉन्‍सेप्‍ट में नयापन है। खासकर डिसॉर्डर से पीड़‍ित लोगों को लेकर फिल्‍म ने दर्शकों तक जिस भाव को पहुंचाना चाहा है, उसमें कामयाब रही है। फिल्‍म बताती है कि आप सिर्फ इसलिए असफल करार नहीं दिए जा सकते कि आप नॉर्मल नहीं हैं। फिल्‍म सामान्‍य जिंदगी में असामान्‍य के फिट होने की दास्‍तान है। लेकिन फिल्‍म के स्‍क्रीनप्‍ले में कुछ खामियां हैं, जो इसे अच्‍छे से बेहतरीन बनने से रोकती हैं। हालांकि, फिल्‍म बतौर दर्शक आपको बांधती है, खुद में मशगूल रखती है और मनोरंजन भी करती है।

5/9नजर आती है डायरेक्‍टर की मेहनत

Hichki Movie Review in Hindi

सिद्धार्थ पी. मल्‍होत्रा की इस फिल्‍म के केंद्र में टॉरेट सिंड्रोम है। नैना का किरदार लगातार ‘वा वा’ और ‘चक चक’ की आवाज करता है। फिल्‍म में डायरेक्‍टर ने जिस तरह जगह जगह ‘वा वा’ की आवाज को फिट किया है, वो तारीफ के काबिल है। बतौर डायरेक्‍टर मल्‍होत्रा ने बेहतरीन रचनात्‍मकता दिखाई है, लेकिन स्‍क्रीनप्‍ले मात खाती है।

6/9रह जाती है कुछ बेहतर की उम्‍मीद

Hichki Movie Review in Hindi

फिल्‍म का पहला हाफ कहानी को स्‍थापित करती है, जबकि इंटरवल के बाद ड्रामा बढ़ता है। ‘हिचकी’ पूरी तरह से भावनात्‍मक फिल्‍म है, लेकिन यह इसके उदगार को उस ऊंचाई तक ले जा पाती है। खासकर क्‍लाइमेक्‍स में आप कुछ और बेहतर की उम्‍मीद रखते हैं।

7/9रानी ने किया है जबरदस्‍त काम

Hichki Movie Review in Hindi

फिल्‍म में रानी मुखर्जी ने गजब की अभ‍िनय क्षमता का प्रदर्शन किया है। टॉरेट सिंड्रोम से पीड़‍ित महिला के किरदार में उन्‍होंने बड़े ही सहज अंदाज से अभ‍िनय किया है। उनकी अदाकारी में एक बहाव है और यह आपको अभ‍िनय जैसा नहीं जान पड़ता है। फिल्‍म की कास्‍ट‍िंग भी जबरदस्‍त है। स्‍कूल में 9वीं क्‍लास के सभी बच्‍चों ने बेहतरीन काम किया है। साइंस टीचर वाडिया के रोल में नीरज काबी भी अच्‍छे लगे हैं।

8/9यादों के तहखाने में ले जाती है फिल्‍म

Hichki Movie Review in Hindi

जसलीन रॉयल का संगीत फिल्‍म को गति देता है। ‘हिचकी’ सिर्फ एक क्‍लासरूम की कहानी नहीं है। इसमें अपार क्षमताएं हैं। नैना की निजी जिंदगी, पिता के साथ संघर्षरत रिश्‍ते, यह सब ऐसे पहलू हैं जिनपर और फोकस किया जा सकता था। इन तमाम खामियों के बाद भी ‘हिचकी’ में एक ताजापन है। इमोशन है। यह आपको स्‍कूल के दिनों की भी याद दिलाती है और अपने सबसे फेवरेट टीचर को याद करने का मौका देती है। ऐसे में फिल्‍म को अच्‍छे ग्रेड तो मिलने ही चाहिए।

9/9देखें, ‘हिचकी’ का ट्रेलर