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Ittefaq Review: दो कत्‍ल, दो कहानियां, एक सच

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इत्‍तेफाक मूवी र‍िव्‍यू

इत्‍तेफाक

रेटिंग:

3/5

कास्‍ट:

सिद्धार्थ मल्‍होत्रा, अक्षय खन्‍ना, सोनाक्षी सिन्‍हा

डायरेक्‍टर:

अभय चोपड़ा

समय:

1 घंटा 40 मिनट

जॉनर:

मिस्‍ट्री

लैंग्‍वेज:

हिंदी

समीक्षक:

रेणुका व्‍यावहारे

1/7कहानी

विक्रम सेठी (सिद्धार्थ मल्‍होत्रा) पर अपनी पत्‍नी के कत्‍ल का इल्‍जाम है। पुलिस पीछे पड़ी है। विक्रम भागते हुए माया (सोनाक्षी सिन्‍हा) के घर पहुंचता है। उसे वहां पनाह मिल जाती है। मुंबई की बारिश वाली काली रात है। माया को जल्‍द ही एहसास होता है कि विक्रम कोई आरोपी है और पुलिस से भाग रहा है। वह पुलिस को खबर कर देती है। पुलिस विक्रम को पकड़ लेती है। लेकिन कहानी में नया मोड़ आता है।

2/7माया के पति की भी हो गई है हत्‍या

Ittefaq Movie Review in Hindi

माया के घर से पुलिस को उसके पति शेखर की लाश मिलती है। माया आरोप लगाती है कि विक्रम ने ही उसके पति का भी खून कर दिया है। लेकिन विक्रम कहता है कि वो निर्दोष है। मामला अब दो कत्‍ल का है। आरोपी एक है और वह भी खुद को निर्दोष बता रहा है। ऐसे में यह केस सौंपा जाता है कि ऑफिसर देव (अक्षय खन्‍ना) को। अब देव के पास तीन दिन का समय है और आगे कत्‍ल के राज का खुलासा है।

3/7समीक्षा

Ittefaq Movie Review in Hindi

‘इत्तेफाक’ साल 1969 में रिलीज यश चोपड़ा की इसी नाम से बनी फिल्‍म का नया वर्जन है। उस फिल्‍म में मुख्‍य भूमिका में राजेश खन्‍ना और नंदा थे। अभय चोपड़ा ने मूल फिल्‍म की थीम को बनाए रखते हुए कहानी में अपनी ओर से कुछ नए ट्विस्‍ट और टर्न डाले हैं। हालांकि, उनके प्रयास में ईमानदार है लेकिन अलग करने के चक्‍कर में महत्वहीन जैसी स्‍थ‍िति भी बनती है।

4/7दोनों की अपनी-अपनी गाथा

Ittefaq Movie Review in Hindi

असल फिल्‍म की कहानी के मुकाबले इस ‘इत्‍तेफाक’ की कहानी और पुलिसिया जांच थोड़ी अध‍िक जटिल है। फिल्‍म में विक्रम अलग कहानी कहता है और माया अलग। चक्‍कर ये है कि दोनों आरोपी यानी माया और विक्रम अलग-अलग तरीके से, किश्‍तों में अपनी कहानी कहते हैं और वो भी उल्‍टे सीक्‍वेंस में।

5/7तालमेल बिठाने में नाकाम

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अब चक्‍कर ये है कि कहानी में बीते हुए कल और आज के बीच सामंजस्‍य बिठाते हुए सस्‍पेंस को बनाए रखना थोड़ा मुश्‍क‍िल हो गया है। मतलब कि डर, तनाव और रहस्‍य इन तीनों का घालमेल तो है, लेकिन ये मजेदार नहीं है।

6/7फिल्‍म की जान हैं अक्षय खन्‍ना

Ittefaq Movie Review in Hindi

हालांकि, पूरी फिल्‍म में अगर कोई एक शख्‍स कहानी को संभालता है और दिलचस्‍पी बनाए रखता है तो वो अक्षय खन्‍ना हैं। वह उदासीन सी हो चली फिल्‍म में जान डालते हैं। उनके साथी पुलिसवालों में मिस्‍टर तांबे बेहतरीन लगे हैं। इसके अलावा सिद्धार्थ मल्‍होत्रा चेहरे पर जरूरी भाव नहीं दिखा पाते हैं, जबकि सोनाक्षी सिन्‍हा के पास करने के लिए बहुत कुछ नहीं है।

7/7कत्‍ल नहीं, ये है सबसे बड़ा रहस्‍य!

Ittefaq Movie Review in Hindi

कुल मिलाकर ‘इत्‍तेफाक’ उस तरह की दमदार और दिलचस्‍प थ्र‍िलर नहीं है, जैसा कि आप अपेक्षा रखते हैं। लेकिन अगर आप फुरसत में हैं तो अक्षय खन्‍ना के लिए यह फिल्‍म देखी जा सकती है। वह स्‍क्रीन पर अच्‍छे लगते हैं। फिल्‍म देखने के बाद सबसे बड़ा रहस्‍य यही जान पड़ता है कि अक्षय खन्‍ना इतने बेहतरीन एक्‍ट‍िंग के बावजूद ज्‍यादा फिल्‍में क्‍यों नहीं करते हैं।