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Mukkabaaz Review: लड़ने और नहीं हारने की जिद है ‘मुक्‍काबाज’

Updated: Jan 11, 2018 15:05 pm
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मुक्‍काबाज मूवी र‍िव्‍यू

मुक्‍काबाज

रेटिंग:

4/5

कास्‍ट:

विनीत कुमार सिंह, जोया हसन, जिम्‍मी शेरगिल, रवि किशन, नवाजुद्दीन सिद्द‍िकी

डायरेक्‍टर:

अनुराग कश्‍यप

समय:

2 घंटे 35 मिनट

जॉनर:

ड्रामा / स्‍पोर्ट

लैंग्‍वेज:

हिंदी

समीक्षक:

रेणुका व्‍यवहारे

1/6कहानी

‘मुक्‍काबाज’ के केंद्र में श्रवण (विनीत कुमार सिंह) है। आम आदमी है। वह एक सम्‍मान भरा जीवन जीना चाहता है। इसके लिए वह हर दिन लड़ता है। मुक्‍केबाजी में उत्तर प्रदेश का माइक टायसन बनने की महत्वाकांक्षा रखता है। उसमें हिम्‍मत भी है और ताकत भी। फिल्‍म में एकसाथ कई लड़ाइयां (शाब्दिक और रूपक) चलती हैं, जो सामाज का आईना भी दिखाती हैं और उस पर टिप्पणी भी करती है।

2/6समीक्षा

Mukkabaaz Movie Review in Hindi

श्रवण को अपनी मुक्‍केबाजी पर भरदम भरोसा भी है और विश्‍वास भी। उसमें आगे बढ़ने का दम भी है। बरेली का एक लोकल गुंडा है भगवान दास मिश्रा (जिम्‍मी शेरगिल)। वह स्‍थानीय बॉक्‍सरों को प्रमोट करता है। लेकिन श्रवण उसके आगे झुकने से इनकार कर देता है। जाहिर सी बात है यह उसके लिए अच्‍छे दिन लेकर तो नहीं ही आएगा। भगवान दास उसे बर्बाद करने की धमकी देता है।

3/6जाति की राजनीति और खेलकूद

Mukkabaaz Movie Review in Hindi

कहानी में दिलचस्‍प मोड़ यह भी है कि श्रवण को भगवान दास की भतीजी सुनैना (जोया हसन) से प्‍यार हो जाता है। भगवान की ताकत लोगों का डर और कमजोरियां हैं, वहीं श्रवण के लिए उसका आत्‍मविश्‍वास उसकी ढाल। भगवान दास और सुनैना ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। यानी फिल्‍म में जाति की राजनीति के साथ खेलकूद और कार्यालय में राजनीति का पुट है।

4/6सामाजिक पाखंड पर तगड़ा चोट

‘मुक्‍काबाज’ सामाजिक पाखंड पर चोट करती है। इसमें प्‍यार की गर्माहट भी है और कॉमेडी का तड़का भी। अनुराग कश्यप ने फिल्‍म में मध्‍यवर्गीय परिवार के सुख-दुख, सामान्य पिता-पुत्र (श्रवण और उनके पिता), पति-पत्नी की बानगी को संजीदगी के साथ पिरोया है। यह फिल्‍म लव स्‍टोरी होने के साथ ही बॉक्‍स‍िंग के जरिए सामाजिक कलंकों पर तगड़ा चोट करती है।

5/6खूब जमी है विनीत और जोया की जोड़ी

Mukkabaaz Movie Review in Hindi

फिल्‍म में प्रोफेशनल बॉक्‍सर नीरज गोयट का किरदार आपको सीट से बांधने की ताकत रखता है। फिल्‍म की कास्‍ट‍िंग की बात करें तो विनीत कुमार सिंह का कठोर अंदाज विशुद्ध बॉक्‍स की तरह लगता है। जोया हुसैन की यह पहली फिल्‍म हैं, लेकिन सुनैना के रोल में वह जबरदस्‍त लगी हैं। वह एक ऐसी युवा लड़की के किरदार में है, जो परिस्‍थ‍ितियों से लड़ती है और निराशा का श‍िकार नहीं होना चाहती।

6/6रवि किशन और जिम्‍मी का जवाब नहीं

रवि किशन जहां अपने दमदार अंदाज में हैं, वहीं जिम्‍मी शेरगिल ने बेहतरीन एक्‍ट‍िंग की है। फिल्‍म का संगीत माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता और इसके लिए रचित अरोड़ा और डीजे न्‍यूक्‍लेया (पैंतरा) का विशेष रूप से जिक्र किए जाने की जरूरत है। फिल्‍म 2 घंटे 25 मिनट की है, जो आपको थोड़ा अधैर्य कर सकती है। लेकिन ‘मुक्‍काबाज’ एक नॉकआउट वाला दांव है। यह बॉक्‍सिंग पर है, लेकिन इसमें सिर्फ बॉक्‍स‍िंग नहीं है।