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भइया विलेन नहीं, असली हीरो थे अमरीश पुरी साहब

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1/10मोगेम्बो खुश हुआ…

amrish puri

आवाज ऐसी मानों किसी गहरे कुएं से निकलकर आ रही हो। बड़ी-बड़ी आंखें जो ठहर-ठहर कर सब कुछ देखना चाहती हैं। जिस शख्स की बात हो रही है, दुनिया उसे मोगेम्बो, डॉन्ग, राक्का, बलवंत राय के नाम से जानती है। अमरीश पुरी ने 1967 से 2005 के बीच 400 फिल्मों में काम किया। उनकी याद आते ही ‘मोगेम्बो खुश हुआ’ वाली फीलिंग आती है।

2/10…लेकिन मोगेम्बो नहीं थे पुरी साहब

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खासतौर पर विलेन को लेकर एक छवि बन जाती है। दुनिया उन्हें सच में ही गुंडा मानने लगती है। लेकिन अमरीश पुरी के साथ ऐसा नहीं था। दुनिया ने उनकी बेहतरीन एक्टिंग वाली फिल्में भी देखी। हैरान आप इस बात को लेकर होने वाले हैं कि जब वो पहली बार मुंबई आए थे। तो उन्हें एक्टिंग के लिए नकार दिया गया था। ऐसा कहा गया था कि उनका चेहरा बहुत पत्‍थर जैसा लगता है। कोई भाव ही नहीं।

3/10फिर करने लगे नौकरी

amrish puri

पुरी साहब का जन्म 22 जून 1932 के दिन पंजाब के जालंधर में हुआ। परिवार पंजाबी था। घर में खुला माहौल था। मशहूर सिंगर केएल सहगल जो कि एक्टिंग भी करते थे। अरे वही, जिन्‍होंने ‘इक बंगला बने न्‍यारा’ गाना गाया। उनके भाई थे। वो मुंबई में बड़ा नाम हो गए थे। आशिक उनके गाने सुनते थे। एक्टिंग का सपना लेकर अमरीश पुरी भी गए थे मुंबई। लेकिन जब नकार दिया गया तो एंप्लाय स्टेट इनश्योरेंस कॉरपोरेशन में काम करने लगे।

4/10चल रहे थे नाटक भी

amrish puri natak

रंगमंच से आए गिने-चुने नामों में अमरीश पुरी का भी नाम है। नौकरी के साथ-साथ वो थिएटर करने लगे। उनके नाटकों के कारण ही उन्हें फिल्मों में काम मिला। रंगमंच के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मशहूर प्लेराइटर सत्यदेव दुबे और गि‍रिश कर्नाड के कई नाटकों में अमरीश ने काम किया। आज भी राष्टीय नाटय विद्यालय में उनकी नाटक करते हुए तस्वीरें अपने समय का इतिहास कहती हैं।

5/10मदन पुरी थे बड़े भाई

madan puri and amrish puri

अपने जमाने के मशहूर एक्टर मदन पुरी अमरीश पुरी के बड़े भाई थे। पुरी साहब  की तरह मदन पुरी की आवाज में भी दम था।

6/1040 साल की उम्र में मिली पहचान

AmrishPuri

दुनिया जल्दी में है। आज बच्चा-बच्चा पैदा होते ही स्टार बनना चाहता है। लेकिन पुरी साहब बहुत सब्र वाले इंसान थे। उनकी शादी बहुत पहले हो चुकी थी। दो बच्चे भी थे। वो नाटक कर रहे थे। नौकरी भी चल रही थी। बस अपने काम को दिल से करना ही उनके लिए एक्टिंग था। 40 साल की उम्र में वो फिल्मी दुनिया में आए थे। सोचिए जरा कितना धैर्य था उनमें। अपनी हार को स्वीकार, वह नाटक करने लगे। कोई जल्दबाजी नहीं।

7/10कई भाषाओं में की हैं फिल्में

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आपने उनकी हिंदी वाली फिल्में ही देखी होंगी लेकिन उन्होंने कन्नड, मराठी, मलयालम, तेलुगू और तमिल फिल्मों में भी काम किया था। इसके अलावा हॉलीवुड की फिल्मों से भी वो जुड़े थे। रिचर्ड एटनबरो की फिल्म ‘गांधी’ में भी वो थे।

8/10स्पीलबर्ग के फेवरेट विलेन

steven and amrish puri

स्टीवन स्पीलबर्ग हॉलीवुड के नामचीन डायरेक्टर हैं। उन्होंने अपनी फिल्म के लिए अमरीश पुरी का कास्ट किया था। इस फिल्म का नाम ‘इंडियाना जोन्स एंड द टैंपल ऑफ डूम’ था। इस रोल के लिए अमरीश पुरी ने सिर मुंडवाया था। स्पीलबर्ग उनके फैन हो गए थे। उन्होंने कहा, ‘अमरीश पुरी मेरे फेवरेट विलेन हैं। ऐसे कलाकार के साथ मैंने पहली बार काम किया है।’

9/10एक फैन होने के नाते

amrish puri fan

‘शक्ति’, ‘विधाता’, ‘घायल’, ‘त्रिदेव’, ‘विधाता’, ‘मिस्टर इंडिया’, ‘दामिनी’, ‘करण-अर्जुन’, ‘कोयला’ के अलावा ना जाने कितनी ऐसी फिल्में हैं जिनमें अमरीश पुरी ने विलेन का किरदार निभाया। लेकिन ‘घातक’ वाले पिता की एक्टिंग का क्या, ‘पार्टी’ फिल्म वाले प्रोफेसर का क्या, ‘गर्दिश’ फिल्म वाले ईमानदार हवलदार का क्या, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ वाले जा सिमरन जा कहने वाले पप्पा को भी नहीं भुलाया जा सकता।

10/10किरदारों के नाम से जाने जाते थे वो

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12 जनवरी 2005 के दिन वो चल बसे। मुंबई में निधन हुआ। मैं बस से कहीं जा रहा था। रास्ते में पता चला कि मोगेम्बो चल बसे। उनका नाम कोई नहीं ले रहा था। किरदारों से जाने जा रहे थे वो। घर जाकर टीवी देखा तो ‘घातक’ फिल्म चल रही थी। काशी (सनी) जेल में होता है और शंभूनाथ (अमरीश पुरी) की मृत्यु हो जाती है। पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त।