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Health tips: दाल खाने के बाद होती है गैस, ब्लोटिंग, ऐंठन-अपच? ट्राई करें ये असरदार घरेलू नुस्खा, झट से मिलेगा आराम

Authored by Usman Khan | Hindi Filmipop | Updated: 24 Nov 2022, 10:38 am

दालों में बड़ी मात्रा में अपचनीय कार्बोहाइड्रेट होते हैं जो पेट की लेयर को परेशान करते हैं और परिणामस्वरूप जीआई पथ में गैस का निर्माण होता है। इन गुणों के कारण, दालों को पचाना कठिन होता है। इसलिए दाल खाने से पहले कुछ विशेष काम करने की आवश्यकता होती है।

 
Health tips: दाल खाने के बाद होती है गैस, ब्लोटिंग, ऐंठन-अपच? ट्राई करें ये असरदार घरेलू नुस्खा, झट से मिलेगा आराम
Health tips: दाल खाने के बाद होती है गैस, ब्लोटिंग, ऐंठन-अपच? ट्राई करें ये असरदार घरेलू नुस्खा, झट से मिलेगा आराम
बीन्स, मटर और फलियां जैसी दालें भारतीय व्यंजनों का एक अनिवार्य हिस्सा हैं और प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होने के कारण इन्हें हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद भी माना जाता है। लेकिन, बहुत से लोग इन्हें खाने के बाद गैस, सूजन, ऐंठन और अपच जैसे लक्षणों की शिकायत करते हैं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. डिंपल जांगड़ा ने इंस्टाग्राम पर इसके कारण शेयर किये हैं।
दाल में पाए जाने वाले पोषक तत्व (nutrition in pulses)
- बड़ी मात्रा में अपचनीय कार्बोहाइड्रेट (फाइबर)
- फाइटिक एसिड, जो मुख्य रूप से फास्फोरस को बीन्स, बीज और नट्स में स्टोर किया जाता है
- सख्त बीन्स जैसे किडनी और नेवी बीन्स में भी ओलिगोसैकेराइड होते हैं। ओलिगोसैकेराइड को कुछ मदद के बिना पचाना मुश्किल होता है क्योंकि हमारा शरीर इसे ठीक से तोड़ने के लिए आवश्यक एंजाइम अल्फा-गैलेक्सी डेज का उत्पादन नहीं करता है।
- जब इनका सेवन किया जाता है, तो ये ओलिगोसैकेराइड निचले आंत में काफी हद तक बरकरार रहते हैं, और एनारोबिक बैक्टीरिया की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन गैसों का प्रोडक्शन करते हैं और इसके कारण सूजन होता है।
दालों में होते हैं न पचने वाले कार्बोहाइड्रेट
दालों में बड़ी मात्रा में अपचनीय कार्बोहाइड्रेट होते हैं जो पेट की लेयर को परेशान करते हैं और परिणामस्वरूप जीआई पथ में गैस का निर्माण होता है। इन गुणों के कारण, दालों को पचाना कठिन होता है। इस लिए दाल खाने से पहले कुछ विशेष काम करने की आवश्यकता होती है। पारंपरिक तरीके की बात करें तो हजारों वर्षों से फलियां खाईं जाती रही हैं लेकिन उन्हें अधिक सुपाच्य बनाने के लिए कुछ विशेष तरीकों का इस्तेमाल किया चाहिए। दालों को भिगोने से लेकर अंकुरित होने तक की पारंपरिक तरीको से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। दालों को अधिक सुपाच्य बनाने के लिए कुछ सरल टिप्स जानें।

दाल, बीन्स को पकाने से पहले कम से कम 24 घंटे भिगोएं
आयुर्वेदिक विशेषज्ञ के अनुसार बीन्स, दाल को भिगोने से उनमें मौजूद कुछ फाइटिक एसिड को खत्म करने में मदद मिलती है। खोए हुए फाइटिक एसिड की मात्रा को अधिकतम करने के लिए, बीन्स को कम से कम 12 घंटे, यहां तक कि 24 घंटे तक भिगोना चाहिए।

अंकुरित दालें या बीन्स सबसे बेहतर
इसके बाद बीन्स या दाल को 48 घंटों के लिए छोड़ दें इससे वे अंकुरित हो जायेंगे। जितनी देर तक वे भिगोए रहेंगे, उन्हें पचाना उतना ही आसान होगा।

दाल को पेट के अनुकूल बनाने के लिए गर्म, क्षारीय पानी में भिगोए
दालों को पेट के अनुकूल बनाने के लिए भिगोने की सबसे उपयुक्त विधि साझा करते हुए, डॉ जांगडा ने बताया है कि बहुत गर्म, alkaline water में भिगोएं। पानी में थोड़ा सा नींबू निचोड़ें और पानी को बार-बार बदलते रहें। पानी निकाल दें, दालों को अधिक पानी से ढक दें,। छान लें, और फिर बहुत गर्म पानी से भिगोने के लिए फिर से ढक दें।

दाल को धीरे-धीरे पकाएं
एक उपाय यह है कि आप अपनी दालों को कम आंच पर बहुत लंबे समय तक पकाएं क्योंकि इससे पचाने वाले रेशों को तोड़ने में मदद मिलती है।

कार्मिनेटिव मसाले एड करें
जीरा, सौंफ, धनिया, इलायची, लौंग, तेज पत्ता, कद्दूकस किया हुआ अदरक, काली मिर्च, चक्र फूल और एक चुटकी हींग जैसे कार्मिनेटिव मसाले" दालों में एड करें। यह पाचन प्रक्रिया में सहायता करता है और इन बीन्स से अतिरिक्त गैस को निकालता है।

दाल खाने के बाद वॉक करें
एक जगह बैठने के बजाय दाल खाने के बाद टहलना अच्छी आदत है। दाल और टुटे हुए बीन्स का ऑप्शन भी चुन सकते हैं क्योंकि वे छोले, उड़द की दाल, राजमा की तुलना में पचाने में आसान होते हैं।