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Review: जानिए कैसी है ‘लाली की शादी में लड्डू दीवाना’

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Laali Ki Shaadi Mein Laddoo Deewana Movie Review in Hindi

लाली की शादी में लड्डू दीवना

रेटिंग:

1.5/5

कास्‍ट:

अक्षरा हासन, विवान शाह, गुरमीत चौधरी, दर्शन जरीवाला, सौरभ शुक्‍ला, संजय मिश्रा

डायरेक्‍टर:

मनीष हरिशंकर

समय:

2 घंटे 10 मिनट

जॉनर:

ड्रामा

लैंग्‍वेज:

हिंदी

समीक्षक:

निहित भावे (टीओआई)

1/6कहानी

लड्डू धोखेबाज है। वह लाली को प्‍यार में धोखा देता है। तब जब लाली प्रेग्‍नेंट होती है। अब लाली की शादी वीर से होने वाली है। लेकिन कहानी में ट्विस्‍ट आता है। वीर को लाली और लड्डू के बारे में पता चलता है।

2/6समीक्षा

फिल्‍म शुरू होती है और शुरुआती कुछ मिनटों में ही यह सब हो जाता है। प्‍यार, प्रेग्‍नेंट, धोखा, दूसरे से शादी, होने वाले दूल्‍हे को दुल्‍हन के पूर्व प्रेमी के बारे में जानकारी। स‍ब कुछ मिनटों में। यहां आप यह साचते हैं कि फिल्‍म तो 2 घंटे लंबी है और यह तो महज शुरुआत है।

3/6एक ही वेन्‍यू पर दोनों की शादी

‘लाली की शादी में लड्डू दीवाना’ की एक बड़ी कमी यह है कि यह शुरुआत में ही आप पर जानकारियों की बौछार कर देती है। इतनी जितनी आपने बोर्ड एग्‍जाम से ठीक पहले पढ़ाई की होगी। बतौर दर्शक हमें पता चलता है कि लाली (अक्षरा हासन) की शादी राजकुमार वीर (गुरमीत चौधरी) से होने वाली है। लाली प्रेग्‍नेंट है। वह लड्डू (विवान शाह) के बच्‍चे की मां बनने वाली है। दिलचस्‍प यह है कि लड्डू की शादी भी उसी जगह हो रही है।

4/6…लो शुरू हो गई है प्रेम कहानी

अब कहानी आगे बढ़ती है। लड्डू की होने वाली दुल्‍हन अपने नैतिक ज्ञान से सभी को बोर करना शुरू करती है। वह क्‍या करना चाहिए और क्‍या नहीं करना चाहिए, जैसे सबक देती है। ठहरिए, वह वीर के सामने कुछ कंफेस (कबूलनामा) भी करती है। अब लाली और लड्डू की प्रेमी दास्‍तान शुरू होती है। गाने बजते हैं। कुछ सफेद झूठ बोले जाते हैं। कश्‍मीर की वादियों से लेकर टेडी बीयर तक सब की एंट्री होती है।

5/6उसने ठुकराया, इन्‍होंने अपनाया

यहां तक तो जो था वो ठीक था। अब कहानी आगे बढ़ती है। चालाक और चतुर लड्डू को उसके पिता अपनाने से इनकार कर देते हैं। वह उसे धूर्त और मूर्ख मानते हैं। लेकिन लाली के माता‍-पिता अपना लेते हैं। यह जानते हुए भी कि इसी लड़के ने उनकी बेटी को प्रेग्‍नेंट किया है। कहानी में वीर भी है। वह गोल्‍फ खेलता है। घुड़सवारी करता है। मस्‍कुलर बॉडी है। राजकुमार है। उसे उसके राज ज्‍योतिषी ने ज्ञान दिया है कि गुडलक के लिए उसे किसी प्रेग्‍नेंट लड़की से ही शादी करनी चाहिए।

6/6कहीं एक्‍टर्स ने, कहीं स्‍क्रिप्‍ट ने किया निराश

अक्षरा हासन और विवान शाह ने हद से ज्‍यादा बेकार प्रदर्शन किया है। संजय मिश्रा ने वही किया है, जिसके लिए वह मशहूर हैं। कुछ नया नहीं, रूटीन टाइप। दर्शन जरीवाला और सौरभ शुक्‍ला की क्षमता का पूरा लाभ नहीं लिया गया है। फिल्‍म कुछ ऐसी बनी है कि आप आधे घंटे में ही सबकुछ समझ जाते हैं और फिर आपके पास समझने के लिए कुछ नहीं होता।

‘लाली की शादी में लड्डू दीवाना’ को नहीं देखने के बहुत से कारण हो सकते हैं। देखने के लिए कोई बड़ा कारण नहीं है।