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Noor Review: फीकी है फिल्‍म, सोनाक्षी की चमक बढ़ी

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Noor Movie Review in Hindi

नूर

रेटिंग:

3.5/5

कास्‍ट:

सोनाक्षी सिन्‍हा, कनन गिल, पूरब कोहली, मनीष चौधरी, स्‍मिता तांबे

डायरेक्‍टर:

सुनहिल सिप्‍पी

समय:

1 घंटे 56 मिनट

जॉनर:

ड्रामा

लैंग्‍वेज:

हिंदी

समीक्षक:

निहित भावे (टीओआई)

1/6कहानी

नूर पत्रकार है। मुद्दों पर आधारित पत्रकारिता करना चाहती है। लेकिन उसकी खुद की जिंदगी के कई मुद्दे अनसुलझे सवाल बन गए हैं। गोते लगा रही लव लाइफ, बिगड़ता करियर और रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ते वजन की परेशानी। यह सब मिलकर ‘नूर’ की कहानी कहते हैं।

2/6समीक्षा

नूर मूवी रिव्‍यु

‘नूर’ के केंद्र में सोनाक्षी सिन्‍हा है। एक लड़की के तौर पर सोनाक्षी नूर के किरदार से जुड़ा हुआ महसूस करती हैं और करवाती भी हैं। नूर आज की लड़की है। ऐसी लड़की जो शराब की कस्‍में खाती है। अलग बात है कि अगले सुबह हैंगओवर होता है। वह बिस्‍तर पर पड़े-पड़े केक खाती है। बाद में वजन करने वाली मशीन को कोसती है। दोस्‍त के डेट पर साथी बनकर जाती है और खुद की सिंगल लाइफ को कोसती है।

3/6जिंदगी, दोस्‍त और एक गंभीर मुद्दा

Noor Movie Review in Hindi

नूर (सोनाक्षी सिन्‍हा) कुछ गंभीर मुद्दों पर रोशनी डालना चाहती है। लेकिन अफसोस कि वह खुद को छोटे-छोटे मुद्दों के बीच रोशनी की अलख की जला पाती हैं। उनके बचपन का दोस्‍त साद (कनन गिल) उसे हौसला देता है। खुशमिजाज बातें करता है। मनीष चौधरी का कैरेक्‍टर मेंटर का काम करता है। नूर को कुछ नया करना है। इस बीच जिंदगी में नया बॉयफ्रेंड आता है अयान (पूरब कोहली)। लेकिन तभी नूर की कामवाली बाई उसे मानव अंग व्‍यापार के बड़े रैकेट की जानकारी देती है।

4/6इस मायने में अलग है ‘नूर’

Noor Movie Review in Hindi

सुनहिल सिप्‍पी इस मामले में प्रशंसा के पात्र हैं कि उन्‍होंने पत्रकारों और मीडिया की रची-गढ़ी छवि से बाहर निकलने का काम किया है। उनकी फिल्‍म में पत्रकार झोला उठाकर नहीं चलता। बतौर दर्शक आप नूर की जिंदगी से कई मायनों में कनेक्‍ट करते हैं। उसके दोस्‍त वैसे ही हैं, जैसे हमारे-आपके, बेवकूफ। उसकी जिंदगी के आधे से ज्‍यादे मुद्दे फिजूल के जान पड़ते हैं। हां, जिंदगी के कुछ हिस्‍सों का संकट असल जान पड़ता है। फिल्‍म में बहुत ज्‍यादा डायलॉग्‍स हैं, लेकिन इनमें फन है।

5/6यहां खलती है कमी

Noor Movie Review in Hindi

‘नूर’ आज की पीढ़ी की कहानी कहती है। लिहाजा उसका आज की पीढ़ी के अनुसार गति में बढ़ना जरूरी है। ‘नूर’ एक गंभीर और प्रासंगिक विषय की ओर ध्‍यान खींचती है, लेकिन समस्‍या के समाधान के बारे में कम ही कहती है। फिल्‍म बहुत हद तक कुर्सी पर बैठकर क्रांति को मंजूरी देती है। नूर के किरदार में और हीरोइज्‍म की जरूरत थी। यदि ऐसा होता तो फिल्‍म बेहतर बन सकती थी।

6/6सोनाक्षी के करियर की दमदार फिल्‍म

Noor Movie Review in Hindi

‘नूर’ फिल्‍म के तौर पर भले ही कोई खास छाप ना छोड़ रही हो, लेकिन सोनाक्षी सिन्‍हा का कद जरूर बढ़ा है। कनन गिल पूरी फिल्‍म में फन बनाए रखते हैं। सोनाक्षी के सात साल के करियर में ‘नूर’ मील का पत्‍थर है। ऐसे में एक बार तो नूर से थि‍एटर में जाकर मिलना बनता है।