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जो घर से दूर हैं उनके दिल के करीब हैं ये गाने

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1/14घर छोड़कर तो देखो

 kabira

जावेद अख्तर का एक शेर है, ‘एक खिलौना फकीर से खो गया था बचपन में, ढूंढता फिरा वो नगर-नगर तन्हा उसे’ यहां खिलौना बचपन है। अज्ञेय एक साहित्यकार थे। उन्होंने लिखा था कि ‘बाप होने के लिए बाप से बहुत दूर जाना पड़ता है।’ बात उस घर की जहां की बस आज भी शहर में दिख जाए तो हम उड़ जाते हैं। वही घर जहां खुशी मटके पर रखी रहती थी। जब मन चाहा उस खुशी को पी लेते थे हम। हर दूसरा शख्स अपने घर से दूर एक दूसरी दुनिया में हैं। चलो यार… कुछ देर के लिए घर चलते हैं। बहुत कुछ बिखरा हुआ है। उस सवारने वाले हैं ये गाने।

2/14एक अकेला इस शहर में (फिल्म: घरौंदा)

3/14चिट्ठी आई है (फिल्म: नाम)

4/14चप्पा चप्पा चरखा चले (फिल्म: माचिस)

5/14एक-दूसरे से करते हैं प्यार हम (फिल्म: हम)

6/14छोड़ आए हम वो गलियां (फिल्म: माचिस)

7/14संदेसे आते हैं (फिल्म: बॉर्डर)

8/14मां (फिल्म: तारे जमीं पर)

9/14कबीरा ( फिल्म: ये जवानी है दीवानी)

10/14घर याद आता है मुझे

11/14जाने नहीं देंगे तुझे (फिल्म: 3 इडियट्स)

12/14लुका झुप्पी (फिल्म: रंग दे बसंती)

13/14मां (फिल्म: दसविदानियां)

14/14मासूम सा (फिल्म: मदारी)