
ऐसा बीता था मधुबाला का बचपन

मधुबाला
मधुबाला ने अपना ज्यादातर समय दिल्ली में गुजारा था और बिना किसी हेल्थ प्रॉब्लम के बड़ी हुईं। उनके पिता के रूढ़िवादी विचारों के कारण ना तो मधुबाला और ना ही जाहिदा को छोड़कर उनकी कोई भी बहन स्कूल गई। मधुबाला ने अपने पिता मार्गदर्शन में उर्दू, हिंदी के साथ अपनी मूल भाषा पश्तो भी सीखी। उन्हें बचपन से ही फिल्में देखने का शौक था। वो अपनी मां के सामने फेवरेट सीन को प्रेजेंट करती थीं और डांस करके और फिल्मी किरदारों की नकल करके खुद को एंटरटेन करती थीं। वो एक्ट्रेस बनना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता ने साफ मना कर दिया था।
पिता का बदला फैसला, मां तो था डर
मधुबाला के पिता का फैसला साल 1940 में बदला, जब उन्हें सीनियर ऑफिसर से बुरा बर्ताव करने पर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। मधुबाला की मां को डर था कि अगर उन्होंने अपनी जवान बेटी को इंडस्ट्री में काम करने की इजाजत दी तो उन्हें बायकॉट का सामना करना पड़ेगा, लेकिन मधुबाला के पिता जिद पर अड़े रहे। 7 साल की उम्र में किया काम

मधुबाला
जल्द ही मधुबाला को खुर्शीद अनवर के कंपोजिशन गाने के लिए ऑल इंडिया रेडियो स्टेशन पर नौकरी दी गई। उस वक्त उनकी उम्र महज 7 साल थी। वो महीनों तक काम करती रहीं। वहीं पर उनका परिचय चुन्नीलाल से हुआ, जो स्टूडियो बॉम्बे टॉकीज के जनरल मैनेजर थे। उन्हें मधुबाला पसंद आ गईं और उन्होंने उनके पिता को नौकरी के बेहतर अवसर के लिए मुंबई जाने का सुझाव दिया। फिर परिवार मुंबई चला गया, वहां पर फिल्मों में काम मिला और फिर वो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की बेहतरीन एक्ट्रेसेस की लिस्ट में शुमार हो गईं।