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कभी नकली गहने सप्लाई करके गुजारा करता था यह एक्टर, बाद में बॉलीवुड पर किया राज, पहचाना?

Edited by Ruhi Dadwal | Hindi Filmipop | Updated: 17 Sep 2023, 4:21 pm

इस एक्टर को कभी फिल्मों के सेट पर नकली जेवर सप्लाई करने पड़ते थे, लेकिन बाद में बड़ा स्टार बना। क्या आप बता सकते हैं कि यह एक्टर कौन है? इस एक्टर ने डेब्यू फिल्म में हीरोइन के बॉडी डबल का रोल किया था।

 
कभी नकली गहने सप्लाई करके गुजारा करता था यह एक्टर, बाद में बॉलीवुड पर किया राज
कभी नकली गहने सप्लाई करके गुजारा करता था यह एक्टर, बाद में बॉलीवुड पर किया राज
बॉलीवुड में ऐसे कई एक्टर रहे हैं, जिन्होंने अपने कदम जमाने से पहले खूब स्ट्रगल किया। वो काम तक किए, जिन्हें आज की पीढ़ी करने से कतराएगी। लेकिन बाद में जबरदस्त स्टारडम बटोरा। हालांकि जब इन्हीं एक्टरों के बेटे या बेटी ने फिल्मों में कदम रखे, तो नेपोटिजम का बिगुल फूंक दिया गया। आज हम जिस एक्टर की बात कर रहे हैं, उसे पहली फिल्म में एक एक्ट्रेस का बॉडी डबल बनना पड़ा था। यही नहीं, गुजारे के लिए नकली जेवर तक सप्लाई करने पड़े थे। क्या आप बता सकते हैं कि हम किस एक्टर की बात कर रहे हैं?
इस तस्वीर में बच्चों के साथ जो एक्टर नजर आ रहा है, उसे पहचानते हैं? इसी एक्टर को नकली गहने सप्लाई करने पड़े थे, और पहली ही फिल्म में लड़की बनना पड़ा था।
कभी नकली गहने सप्लाई करके गुजारा करता था यह एक्टर, बाद में बॉलीवुड पर किया राज, पहचाना?

फोटो साभार: ETimes


जीतेंद्र का असली नाम और फिल्मी करियर

यह हैं एक्टर Jeetendraजीतेंद्र, जिनका असली नाम रवि कपूर है। जीतेंद्र ने 60 के दशक से लेकर 90 के दशक तक फिल्में कीं। जीतेंद्र को बड़ा ब्रेक वी. शांताराम की फिल्म 'गीत गाया पत्थरों ने' से मिला था, जो 1964 में आई थी। लेकिन जिस फिल्म से एक्टर ने कामयाबी का स्वाद चखा था, वह थी 1967 में आई 'फर्ज'। इसके बाद उन्होंने 'कारवां' और 'हमजोली' जैसी हिट फिल्में कीं। फिल्म 'फर्ज' के गाने 'मस्त बहारों का मैं आशिक' गाने के लिए जीतेंद्रे ने एक रिटेल स्टोर से टी-शर्ट और सफेद जूते खरीदे थे। और वही उनके ट्रेडमार्क बन गए।

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फोटो साभार: ETimes


जीतेंद्र का स्ट्रगल, नकली गहनों के दम पर गुजारा

जीतेंद्र ने करियर में स्टारडम तो देखा, लेकिन 1960-66 के बीच काफी स्ट्रगल भरा वक्त भी देखना पड़ा था। फिल्मों में आने से पहले जीतेंद्र पिता के साथ गहनों की दुकान पर काम करते थे। जीतेंद्र तब फिल्मों में नकली जेवर सप्लाई करते। तब सोचा भी नहीं था कि वह एक दिन एक्टर बनेंगे। साल 1959 की बात है। एक दिन जब जीतेंद्र, वी. शांताराम की एक फिल्म के सेट पर नकली गहने सप्लाई करने पहुंचे, तो डायरेक्टर की नजर उन पर पड़ी।

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ऐसे मिली फिल्म, बदल गई किस्मत

डायरेक्टर ने जीतेंद्र को देखते ही अपनी फिल्म 'नवरंग' में एक रोल करने का ऑफर दे दिया। तब जीतेंद्र को यह पता नहीं था कि रोल क्या है। बाद में पता चला कि उन्हें फिल्म की लीड हीरोइन संध्या की बॉडी डबल बनना था। जीतेंद्र ने यह रोल किया, और वी. शांताराम के साथ उनका अनोखा रिश्ता बन गया। वी. शांताराम ने ही एक्टर को जीतेंद्र नाम दिया था। जीतेंद्र अब फिल्मों से दूर रहते हैं। हालांकि वह कभी-कभी पब्लिक इवेंट्स में नजर आ जाते हैं।