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क्‍या आपके बच्‍चे की आंखें हो गई हैं कमजोर, चश्मा लगाना पड़ेगा या नहीं, जानिए ऐसे

Authored by Puneet Saini | Hindi Filmipop | Updated: 3 Dec 2022, 2:47 pm

घंटों तक करीब से मोबाइल, टीवी, टैबलेट देखने के कारण बच्चों की आंखों पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसे में हर पैरेंट को अपने बच्चों की आंखों का खास ख्‍याल रखना चाहिए।

 
क्‍या आपके बच्‍चे की आंखें हो गई हैं कमजोर, चश्मा लगाना पड़ेगा या नहीं, जानिए ऐसे
क्‍या आपके बच्‍चे की आंखें हो गई हैं कमजोर, चश्मा लगाना पड़ेगा या नहीं, जानिए ऐसे
आजकल बच्चों में विजन प्रॉब्लम आम है। हालांकि, कोरोना वायरस महामारी के बाद से यह समस्या तेजी से बढ़ी है। लगातार टीवी, मोबाइल, टैबलेट को करीब से देखने के कारण बच्चों की आंखों की रोशनी कम हो रही है। पेरेंट्स के रूप में हम सभी चाहते हैं कि हमारे बच्चे के पास पढ़ाई के लिए सभी उपकरण मौजूद हों। लेकिन हम उनकी आंखों के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाते।
तीन से चार घंटे लगातार टीवी, मोबाइल देखने से बच्चों को आंखों में दर्द, सिर में दर्द, आंखों में आंसू आने जैसी समस्या होने लगी है। लेकिन पैरेंट्स इन सबकी उम्मीद नहीं करते और न ही अपने छोटे छोटे नौनिहालों को चश्मा लगाते देख सकते हैं। इसलिए कई बार सब कुछ सामने होते हुए भी इन लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। नतीजतन आंखों की रोशनी और कम होती जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे के शुरुआती 7 से 8 सालों में उनकी आई पावर का खास ध्यान रखना चाहिए।
कोरोना महामारी के बाद से अब तक कई बच्चों को चश्मा लग चुके हैं। लेकिन आज भी पैरेंट़स को यह जानने में परेशानी हो रही है कि वे अपने बच्चों में विजन प्रॉब्लम की पहचान कैसे करें। खासतौर से जो बच्चे बातचीत करने के लिए अभी बहुत छोटे हैं , इन बच्चों के माता-पिता आसानी से आई प्रॉब्लम को नोटिस नहीं कर पाते। अगर आप भी इसी उलझन में है, तो हम यहां आंखों के कमजोर होने के कुछ संकेत बता रहे हैं। ताकि आप जान सकें कि वास्तव में आपके बच्चे की आंखें कमजोर हैं या नहीं और इसे चश्मे की जरूरत पड़ेगी या नहीं।


बार-बार आंखें मूंदना-

क्‍या आपने कभी महसूस किया है कि आपका बच्चा पास या दूर की चीज देखने के लिए संघर्ष कर रहा है। बच्चे कई बार कुछ देखने के लिए आंखें सिकोड़ लेते हैं। इसे Squinting कहते हैं। यह कुछ देर के लिए आंख के आकार को थोड़ा बदलकर विजन में सुधार करने में मदद करती है। Squinting से आंख में प्रवेश करने वाली लाइट की मात्रा कम हो जाती है, जिससे कोई भी दूर या पास की चीज अच्छे से दिखाई देने लगती है। अगर ऐसा है, तो तय है कि आपके बच्चे की आंखों की रोशनी कम हो गई है।

बार-बार सिरदर्द होना-


सिरदर्द होना आम बात है, लेकिन अगर बच्चे को बार-बार सिरदर्द हो रहा है, तो यह संकेत है कि अब आपके बच्चे को जल्द ही चश्मे की जरूरत पड़ने वाली है। आंखों की मांसपेशियों में थकान के कारण बार-बार सिरदर्द होता है।

आंखें मलना-

आँखे मलना कोई समस्या नहीं है। कई छोटे बच्चे सोते समय आंखें मलते हैं। एलर्जी होने के कारण भी कई बार बच्चा आंखे मल सकता है। हालांकि, आंखों का रगड़ना आंखों में थकान का संकेत भी है। अगर बच्चा पढ़ाई करते या टीवी देखते वक्त बार-बार आंखें मल रहा है, तो मतलब है कि उसे ठीक से दिखाई नहीं दे रहा है और अब उसे चश्मे की जरूरत है।

पढ़ते समय उंगली रखे-

अगर बच्चा कुछ रीड कर रहा है, तो देखें कि क्या वह अपनी जगह बनाए रखने के लिए उंगली का इस्तेमाल कर रहा है। पढ़ते वक्त शब्दों पर उंगली रखना कोई गलत आदत नहीं है, इससे बच्चे स्वतंत्र होकर पढ़ना सीखते हैं। लेकिन कहीं न कहीं ये विजन प्रॉब्लम को दर्शाता है।


जरूरत से ज्यादा आंसू आना-

आमतौर पर रोते हुए हमारी आंखों से आंसू आते हैं, लेकिन अगर बच्चे की आंखें बिना किसी वजह से गीली हो रही हैं, तो समझ लीजिए कि उसे ठीक से नजर नहीं आ रहा है।

टीवी के बहुत पास बैठना-

अगर बच्चा टीवी बहुत करीब से देखता है, पढ़ने के लिए सिर को बहुत नीचे झुकाता है या फिर फोन या टैबलेट को आंखें के एकदम नजदीक रखता है, तो यह खराब दृष्टि के लक्षण हैं। आपको समझना चाहिए कि बच्चे की आंखें थकी हुई हैं और वह आंखों की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में तुरंत आई स्‍पेशलिस्‍ट के पास जाकर उसका आई चेकअप कराएं।