Home मूवी रिव्यू

October Review: अनकहे प्‍यार की दिल को छू लेने वाली कहानी

Updated: Apr 13, 2018 12:22 pm
SHARE

अक्‍टूबर

रेटिंग:

4/5

कास्‍ट:

वरुण धवन, बनिता संधू, गीतांजलि राव, साहिल वेदोलिया

डायरेक्‍टर:

शूजीत सरकार

समय:

1 घंटे 56 मिनट

जॉनर:

रोमांस / ड्रामा

लैंग्‍वेज:

हिंदी

समीक्षक:

मधुरिता मुखर्जी

1/10कहानी

वरुण धवन (डैन) होटल मैनेजमेंट स्‍टूडेंट है। दिल्‍ली के एक फाइव स्‍टार होटल में वह अपने बैचमेट्स के साथ इंटर्नश‍िप कर रहा है। इसी दौरान एक दिन होटल में एक दुर्घटना होती है और डैन की क्‍लासमेट बनिता संधू (सिउली) घायल हो जाती है। डैन पर इसका बहुत गहरा असर होता है। वह भावनाओं की उधेड़बुन में रहने लगता है। एक नए तरह के अनोखे प्‍यार और स्‍थ‍ितियों को समझने की कोश‍िश शुरू होती है।

2/10समीक्षा

October Movie Review in Hindi

शूजीत सरकार की ‘अक्‍टूबर’ बहुत कम बोलते हुए भी बहुत कुछ कह जाती है। यह एक प्रेम कहानी है, जिसमें डैन की सादगी और सरल आंखों से देखते हैं। डैन दुनिया को अपने मासूम अंदाज और सिउली की खामोशी से समझता है। फिल्‍म की कहानी में जोनर के लिहाज से दमदार डायलॉग्‍स हैं, रोमांटिक संगीत है। फिल्‍म की खासियत इसकी सरलता है।

3/10वरुण धवन का मासूम अंदाज

October Movie Review in Hindi

डैन 21 साल का है। लेकिन दुनिया के समानांतर चलने के लिए उसमें अभी और समझदारी की जरूरत है। वह काम को लेकर थोड़ा बेफिक्र है। गलतियां कर बैठता है। लेकिन इसमें अक्‍खड़पन नहीं है, मासूमियत है। वह ऊंची आवाज में बात नहीं करता, लेकिन थोड़ा मुंहफट है। उसकी ये आदतें, उससे प्‍यार करने पर मजबूर कर देती हैं। सिउली उसकी बैचमेट है, लेकिन दोनों के बीच कोई खास रिश्‍ता नहीं है। व्‍यवहारिक हाय-हैल्‍लो के अलावा और कुछ नहीं।

4/10एक अनकहे रिश्‍ते की शुरुआत

October Movie Review in Hindi

फिल्‍म में दुर्घटना का होना अहम मोड़ साबित होता है। सिउली अब अस्‍पताल में बिस्‍तर पर है। उसके चारों ओर खामोशी है। डैन उसकी इस खामोश दुनिया में आता है। दोनों के बीच यहीं से एक अनकहे रिश्‍ते की शुरुआत होती है। शायद इसे प्‍यार कह सकते हैं, लेकिन ये अनोखा है।

5/10आप भूल जाते हैं कि ये फिल्‍म है

October Movie Review in Hindi

शूजीत सरकार ने फिल्‍म के हर सीन में जान डालने की कोश‍िश की है। वह इसमें सफल भी होते हैं। फिल्‍म जीवन के एक खास पहलू की ओर ध्‍यान खींचती है, जो खाली है। लेकिन यह कहीं भी बोर नहीं करती। कई बार आप यह भूल जाते हैं कि आप फिल्‍म देखने पहुंचे हैं। बतौर दर्शक आपको लगता है कि आप असल जीवन में दो लोगों की जिंदगी को दूर से निहार रहे हैं। फिल्‍म में वो सीन जहां डैन और सिउली पनप रहे अनकहे रिश्‍ते को समझते हैं, दर्शकों पर गजब असर छोड़ती है। आप भावनाओं में बहने लगते हैं, लेकिन चेहरे पर मुस्‍कान आती है। फिल्‍म के स्‍क्रीनप्‍ले में हंसी का भी पुट है, लेकिन यह इतनी बारीकी से बुना गया है कि आप कई बार आश्‍चर्य कर सकते हैं।

6/10यह देखने नहीं, महसूस करने की कहानी है

October Movie Review in Hindi

फिल्‍म के संगीतमय स्‍क्रीनप्‍ले, कहानी और डायलॉग्‍स पर जूही चतुर्वेदी ने हर सीन में कोई कसर नहीं छोड़ी है। फिल्‍म आपको पर्दे से एक पल भी नजर हटाने नहीं देती है। कहानी देखने और समझने से आगे महसूस करने की चाहत को समेटती है। फिल्‍म के सबसे प्रभावी सीन में डायलॉग्‍स को सरलता, खामोशी और एक खालीपन के साथ परोसा गया है। अविक मुखोपाध्‍याय की सिनेमेटोग्राफी ने हर फ्रेम को जैसे कविता की तरह कैप्‍चर किया है। शांतनु मोइत्रा का बैकग्राउंड स्‍कोर दर्शक के द‍िल और द‍िमाग को अलग ही दुनिया में ले जाता है।

7/10वरुण को लेकर आपकी सोच बदल जाएगी

October Movie Review in Hindi

वरुण धवन ने अपने अब तक के करियर की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है। शूजीत ने बेहतरीन तरीके से वरुण के भीतर की मासूमियत को उभारा है, जो आपको यह भूलने पर मजबूर कर देती है कि कभी यह हीरो शर्टलेस होकर नाचता-गाता फिरता था। बनिता संधू की यह डेब्‍यू फिल्‍म है और उन्‍होंने अपनी आंखों से जिस तरह किरदार की खामोशी को जीने का काम किया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। सिउली की मां के किरदार में गीतांजलि का काम बेहतरीन है।

8/10इस प्‍यार की कोई सीमा नहीं है…

October Movie Review in Hindi

‘अक्‍टूबर’ सिर्फ भारतीय संवेदनाओं की फिल्‍म नहीं है। यह एक मानवीय कहानी कहती है, जिसे दुनिया का हर दर्शक महसूस कर सकता है। यह संभव है कि बॉलीवुडिया फिल्‍मों के दर्शक इस फिल्‍म में गति नहीं होने को मिस करें, लेकिन यकीन मानिए कई बार ठहराव भी जरूरी है। डायरेक्‍टर ने फिल्‍म को कुछ इस तरह गढ़ा है, जैसे यहां प्‍यार को खुद अपना रास्‍ता तय करने के लिए छोड़ दिया गया हो।

9/10खामोशी के साथ खुशबू को महसूस कीजिए

October Movie Review in Hindi

प्‍यार के रिश्‍ते में बहुत कुछ अनकहा और अपरिभाषित होता है। ये ऐसी भावनाएं होती हैं, जिनके लिए कोई शब्‍द नहीं हैं। इन्‍हें सिर्फ बहाव की जरूरत होती है। सिउली (बंगाली भाषा में रात की रानी फूल का दूसरा नाम) और डैन के प्‍यार की खुशबू और यादें लंबे समय तक आपके साथ रहने वाली हैं। इसलिए इसे महसूस कीजिए।

10/10देख‍िए, ‘अक्‍टूबर’ फिल्‍म का ट्रेलर-