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Padman Review: मां-बहनें ही नहीं, पापा-ताऊ भी जरूर देखें

Updated: Feb 09, 2018 12:00 pm
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पैडमैन मूवी रिव्‍यू

पैडमैन

रेटिंग:

3.5/5

कास्‍ट:

अक्षय कुमार, राधिका आप्टे, सोनम कपूर

डायरेक्‍टर:

आर बाल्की

समय:

2 घंटा 20 मिनट

जॉनर:

ड्रामा/बायोग्राफी

लैंग्‍वेज:

हिंदी

समीक्षक:

रेणुका व्‍यावहारे

1/10कहानी

लक्ष्‍मीकांत चौहान एक सीधा-सादा, लेकिन होनहार आदमी है। वेल्‍ड‍िंग वर्कशॉप में काम करता है। बीवी गायत्री (राध‍िका आप्‍टे) से बहुत प्‍यार करता है, लिहाजा उसकी जिंदगी को सरल और बेहतर बनाने की हर संभव कोश‍िश करता है। लक्ष्‍मीकांत की बीवी माहवारी (पीरियड्स) के दिनों में कपड़ा इस्‍तेमाल करती है। लोक-लाज के कारण वह उस गंदे कपड़े को छ‍िपाकर भी रखती है। लक्ष्‍मी को महीने के उन पांच दिनों में गायत्री की स्‍वच्‍छता की चिंता है। वह उसे सैनिटरी पैड लाकर देता है, लेकिन महंगा होने के कारण गायत्री कपड़े के इस्‍तेमाल पर ही जोर देती है।

2/10वो विषय जिस पर चर्चा ‘वर्जित’ है

Padman Movie Review in Hindi

लक्ष्‍मी को अब इस ‘लेडीज प्रॉब्‍लम’ की चिंता सताने लगती है। उसकी चिंता पत्‍नी से आगे बढ़कर समाज की दूसरी औरतों के लिए भी है। सस्‍ता पैड बनाना अब उसकी लगन नहीं जिद है। लेकिन समस्‍या ये है कि कोई भी महिला यहां तक कि उसकी पत्‍नी भी इस विषय पर खुलकर बात करने से कतराती है। माहवारी को लेकर दकि‍यानूसी सोच भी उसकी जिद के आड़े आती है। लेकिन क्‍या लक्ष्‍मी अपने मकसद में कामयाब होगा, अगर हां तो कैसे?

3/10समीक्षा

Padman Movie Review in Hindi

दुनिया में छा जाने की चाहत भले ही हर किसी के दिल में होती है, लेकिन इसे बदलने की इच्‍छा और उसके लिए जरूरी जुनून बहुत कम लोगों में होता है। ‘पैडमैन’ के जरिए आर. बाल्‍की ने असल जिंदगी में अरुणाचलम मुरुगनाथम की कहानी को पर्दे पर उतारा है, जो प्रेरणादायक है। कोयंबटूर के अरुणाचलम ने भारत में सस्‍ते सैनिटरी पैड का आविष्‍कार किया। इस महान कार्य के लिए उन्‍हें समाज का विरोध सहना पड़ा। घोर शर्मिंदगी उठानी पड़ी। घर-परिवार भी छोड़ना पड़ा। बाल्‍की ने फिल्‍म के प्‍लॉट को कोयंबटूर की बजाय मध्‍य प्रदेश के महेश्‍वर रखा है, लेकिन कहानी के मर्म को टूटने नहीं दिया है।

4/10फिल्‍म और सरकारी विज्ञापन में फर्क

Padman Movie Review in Hindi

फिल्‍म सोशल मैसेज पर है। अक्षय कुमार की पिछली फिल्‍म ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ भी ऐसी ही थी। लेकिन इस बार फिल्‍म में आंकड़ों का कई बार जिक्र है। आप फिल्‍म देखकर निकलते हैं तो आपको यह बात याद हो जाती है कि भारत में 12-18 फीसदी महिलाएं ही सैनिटरी पैड का इस्‍तेमाल करती हैं। कुल मिलकार कई जगहों पर ‘पैडमैन’ फिल्‍म के रूप में जनसेवा को लेकर किया जा रहा सरकारी विज्ञापन लगता है।

5/10जरूरत से ज्‍यादा डिटेल में फंस गए

Padman Movie Review in Hindi

सस्‍ता सैनिटरी पैड समाज की जरूरत है। माहवारी कोई आज की बात नहीं है। यह प्राक‍ृतिक है, जन्‍म और मरण की तरह सामान्‍य बात। लेकिन फिल्‍म में माहवारी से लेकर सस्‍ते पैड की जरूरत, महिलाओं का इसे खुलेआम खरीदने और इस पर बात करने में शर्म आदि को बताने-समझाने और दिखाने में बहुत समय लिया गया है।

6/10आत्‍मविश्‍वास का संचार करती है फिल्‍म

Padman Movie Review in Hindi

फिल्‍म एक सोशल ड्रामा है ऐसे में एक बार तो इसका दीदार जरूरी है। खासकर इसलिए भी कि जिस समाज में महिलाएं पीरियड्स और पैड के बारे में घर में ठीक से बात नहीं कर पातीं, उसे 500-1000 लोगों के साथ सिनेमाघर में बड़े पर्दे पर 2 घंटे से अध‍िक देखना-सुनना आत्‍मविश्‍वास भरता है।

7/10कई मौकों पर सुस्‍त है स्‍क्रीनप्‍ले

Padman Movie Review in Hindi

बतौर डायरेक्‍टर बाल्‍की के लिए फिल्‍म में सबसे बड़ा चैलेंज मनोरंजन करते हुए संदेश देना है। स्‍वच्‍छता सिर्फ एक विषय नहीं है। यह एक जीवनशैली है और इससे कई सारी चीजें अपने-आप जुड़ जाती हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों के लिए यह बात और भी जरूरी है। ऐसे में बातों से ज्‍यादा भावनाओं को टटोलने की जरूरत है। बाल्‍की इन सभी मोर्चों पर डटे हुए दिखे हैं। हालांकि, स्‍क्रीनप्‍ले कई मौकों पर सुस्‍त है। लेकिन फिर संभल भी जाती है।

8/10सुपरहीरो है ये पगला

Padman Movie Review in Hindi

अक्षय कुमार फिल्‍म के ‘सुपरहीरो’ हैं। अपनी पिछली कुछ फिल्‍मों से उन्‍होंने लगातार ये साबित किया है कि उन्‍हें एक्‍ट‍िंग के मोर्चे पर कमतर नहीं आंका जा सकता। वह अपनी बॉडी लैंग्‍वेज से बहुत कुछ कह जाते हैं। वह फिल्‍म में लड़कियों वाली पिंक अंडरवीयर पहनते हैं। लड़कियों की जरूरत को समझने के लिए पैड लगाते हैं। इससे जाहिर होता है कि फिल्‍म की कहानी पर भरोसा हो तो एक एक्‍टर अपने कैरेक्‍टर के हदों को पार कर सकता है।

9/10राध‍िका और सोनम का बढ़‍िया काम

Padman Movie Review in Hindi

राधिका आप्‍टे ने अपना काम बखूबी किया है। गायत्री के रूप में वह ऐसी महिलाओं का प्रतिनिध‍ित्‍व करती हैं, जो अपने पति से भी खुलकर ‘लेडीज प्रॉब्‍लम’ के बारे में बात नहीं करना चाहती हैं। बीमारी से मरना उनके लिए शर्म से मरने से बेहतर है। सोनम कपूर की एंट्री फिल्‍म को फ्रेशनेस देती है। कहानी में रफ्तार भी वहीं से आती है।

10/10कलेक्‍शन नहीं, ये होगी असली सफलता

Padman Movie Review in Hindi
अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्‍ना के साथ अरुणाचलम मुरुगनाथम

सिनेमा का काम सिर्फ मनोरंजन करना नहीं है। श‍िक्ष‍ित करना भी है। उम्र और लिंग अंतर को तोड़ने के लिए भी यह सशक्‍त माध्‍यम है। बाल्‍की का ‘पैडमैन’ सशक्तीकरण पर बल देता है। यह आपको बाधाओं को पार करने और उड़ने के लिए पंख देता है। फिल्‍म के लिए यह सबसे बड़ी सफलता होगी, यदि इसे देखकर महिलाएं ‘पीरियड्स’ के दौरान अपनी परेशानियों को लेकर मुखर हों और इस ओर स्‍वच्‍छता की जरूरत को समझे।