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B’day विशेष: बहन के कारण हिंदू से मुसलमान बन गए रहमान

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1/12खुदा से जोड़ती है रहमान की आवाज

Reason Why AR Rahman Changed His Reason From Hindu To Muslim News in Hindi

ए.आर. रहमान बॉलीवुड और हिंदी संगीत की दुनिया का वो नाम है, जिसे किसी पहचान की जरूरत नहीं। दुनिया के 10 सर्वश्रेष्‍ठ संगीतकारों में शुमार रहमान की गायिकी के भी सभी कायल हैं। सूफी संगीत को लेकर उनका रुझान और सूफी गानों में उनकी आवाज वाकई इंसान को खुद से जुदा कर देती हैं और खुदा तक ले जाती हैं। 6 जनवरी 1967 को चेन्‍नई में जन्‍मे रहमान की जिंदगी जैसे संगीत के ही नाम है।

2/12नाम था दिलीप, बन गए ए.आर. रहमान

Reason Why AR Rahman Changed His Reason From Hindu To Muslim News in Hindi

महज 11 साल की उम्र से रहमान ने मलयालम कंपोजर एम.के अर्जुन के ऑर्केस्‍ट्रा में कीबोर्ड बजाना शुरू कर दिया था। मासूम उम्र से ही उन्‍होंने पंडित धनराज से संगीत की श‍िक्षा लेनी शुरू कर दी। लेकिन क्‍या आप जानते हैं, तब उनका नाम ए.आर. रहमान नहीं, बल्‍क‍ि दिलीप कुमार था। आज के वक्‍त में जहां धर्म बदलने को लेकर तमाम तरह की चर्चा और बहस होती रहती है। दिलीप की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया, जब उसने अपनी बहन के कारण इस्‍लाम धर्म कबूल लिया।

3/129 साल की उम्र में छूटा पिता का साया

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ए.आर. रहमान यानी अल्‍लाह रक्‍खा रहमान के पिता आर.के. शेखर फिल्‍म-स्‍कोर कंपोजर थे और मलयालम फिल्‍मों में संगीत देतते थे। जब रहमान के पिता का देहांत हुआ, तब वो महज 9 साल के थे। उनकी मां करीमा (जन्‍म के वक्‍त कस्‍तूरी) पर बच्‍चों के पालन-पोषण का पूरा जिम्‍मा आ गया।

4/12बहन की तबीयत हो गई थी खराब

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आस्‍था किसी धर्म में जकड़ी नहीं जा सकती। यह तो विश्‍वास का नाम है। रहमान की मां को सूफी संत पीर करीमुल्लाह शाह कादरी पर बहुत भरोसा था. हालांकि वह खुद हिंदू धर्म को मानती थीं। रहमान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि 23 साल की उम्र में उनकी बहन की तबीयत बेहद खराब हो गई थी। तमाम ईलाज के बाद भी स्‍वास्‍थ में कोई सुधार नहीं हो रहा था।

5/12पूरे परिवार ने कुबूल किया इस्‍लाम

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मां को पीर बाबा पर बहुत भरोसा था। लिहाजा पूरा परिवार इस्लामिक धार्मिक स्थल गया। इसके बाद उनकी बहन स्वस्थ हो गई। रहमान और उनके परिवार पर इस बात का बहुत गहरा असर हुआ। 1989 में वह उनके पूरे परिवार ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया। दिलीप कुमार अब अल्लाह रखा रहमान हो गए।

6/12सूफिज्‍म की ओर बढ़ा रुझान

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रहमान ने धर्म परिवर्तन का जिक्र करते हुए इंटरव्‍यू में कहा था, ‘मेरे पिता के निधन के 10 साल बाद हम कादरी साहब से फिर मिलने गए थे। वो अस्वस्थ थे और मेरी मम्मी ने उनकी देखभाल की थी। वो उन्हें अपनी बेटी मानते थे। हमारे बीच मजबूत कनेक्शन था।’ इस क्रम में रहमान का झुकाव सूफिज्‍म की तरफ बढ़ा। उनके परिवार को सूफिज्‍म में सुकून मिलता था, लिहाजा सभी ने सूफी इस्लाम को अपना लिया।

7/12पसंद नहीं था अपना नाम

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रहमान ने यह भी बताया कि उन्‍हें अपना असली नाम दिलीप कुमार पसंद नहीं था। नाम बदलने के बारे में बात करते हुए उन्होंने इंटरव्यू में कहा, ‘सच्चाई यह है कि मुझे अपना नाम पसंद नहीं था। यह मेरी इमेज पर सूट नहीं करता था।’

8/12हिंदी ज्‍योतिष ने दिया मुस्‍ल‍िम नाम

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सूफिज्म अपनाने के पहले रहमान का परिवार एक ज्योतिष के पास बहन की कुंडली दिखाने गया था। उनकी मां तब बेटी की शादी करना चाहती थी। तब रहमान अपना नाम भी बदलना चाहते थे। ज्योतिषी कहा था कि अब्दुल रहमान और अब्दुल रहीम नाम उनके लिए अच्छा रहेगा। रहमान कहते हैं, ‘मुझे रहमान नाम पसंद आ गया। हिंदू ज्योतिष ने मुझे मुस्लिम नाम दिया था। मेरी मां चाहती थीं कि मैं अपने नाम में अल्लाह रक्‍खा भी जोड़ लूं। इस तरह मैं ए.आर. रहमान बन गया।’

9/12सिंथेसाइजर से है विशेष लगाव

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संगीत और रहमान का जुड़ाव कुछ ऐसा था कि वो 11 साल की उम्र में बचपन के दोस्त शिवमणि के साथ ‘रहमान बैंड रुट्स’ के लिए सिंथेसाइजर बजाने का काम करते थे। चेन्नई के बैंड ‘नेमेसिस एवेन्यू’ की स्थापना में भी रहमान का अहम योगदान रहा। रहमान तब पियानो, हारमोनयिम, गिटार भी बजा लेते थे।

10/12लंदन के ट्रिनिटी कॉलेज से संगीत की तालीम

रहमान तमाम म्‍यूजिक इंस्‍ट्रूमेंट्स में सिंथेसाइजर को कला और तकनीक का अद्भुत संगम मानते हैं। बैंड ग्रुप में ही काम करने के दौरान रहमान को लंदन के ट्रिनिटी कॉलेज से स्कॉलरशिप मिला। इस कॉलेज से उन्होंने पश्चिमी शास्त्रीय संगीत में तालीम हासिल की। साल 1991 में रहमान ने अपना खुद का म्यूजिक रिकॉर्ड करना शुरू किया। 1992 में उन्हें फिल्म निर्देशक मणिरत्नम ने ‘रोजा’ में संगीत देने का मौका दिया। फिल्‍म का म्‍यूजिक जबरदस्त हिट साबित हुआ और रहमान रातों-रात सुपरस्‍टार बन गए। उन्‍हें अपनी पहली फिल्म के लिए ही फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।

11/12बिक चुकी हैं 200 करोड़ से अध‍िक रिकॉर्ड‍िंग्‍स

ए.आर. रहमान की पॉपुलैरिटी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके गानों की 200 करोड़ से भी अधिक रिकॉर्डिग बिक चुकी हैं। देश की अजादी के 50वें सालगिरह पर 1997 में उन्‍होंने ‘वंदे मातरम’ एलबम लॉन्‍च किया। इसका गीत ‘वंदे मातरम’ आज भी देशवासियों के रगों में देशभक्‍त‍ि का जज्‍बा भर देता है।

12/12गिनीज बुक में दर्ज है नाम

साल 2002 में बीबीसी वर्ल्ड सर्विसेज ने 7000 गानों में से 10 सबसे मशहूर गानों को चुनने का सर्वेक्षण करवाया। इसमें रहमान के ‘वंदे मातरम’ को दूसरा स्थान मिला। रहमान देश के लिए ऑस्‍कर अवॉर्ड जीत चुके हैं। यही नहीं, सबसे ज्यादा भाषाओं में किसी गाने (वंदे मातरम) की प्रस्तुति देने के कारण ए.आर. रहमान का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।