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Rangoon Review: ब्‍लडी हेल! इस इश्‍क में असर कम है

Updated: Mar 10, 2017 18:14 pm
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रंगून

रेटिंग:

3.5/5

कास्‍ट:

सैफ अली खान, शाहिद कपूर, कंगना रनोट

डायरेक्‍टर:

विशाल भारद्वाज

समय:

2 घंटे 47 मिनट

जॉनर:

ड्रामा

लैंग्‍वेज:

हिंदी

समीक्षक:

मीणा अय्यर (टीओआई)

कहानी

फिल्‍म का प्‍लॉट देश की आजादी से पहले का है। युद्ध का समय है और इस दरम्‍यान एक प्रेम कहानी है। जैसा कि हम सभी जानते हैं आजादी की लड़ाई कई तरह से लड़ी गई। महात्‍मा गांधी ने अहिंसा का रास्‍ता चुना। सुभाष चंद्र बोस ने इंडियन नेशनल आर्मी का। मकसद एक ही था। दुश्‍मनों से यानी अंग्रेजों से आजादी पाना।

युद्ध की जमीन पर दिलकश जूलिया

rangoon ki samiksha | रंगून की समीक्षा

खैर, 40 के दशक में एक डेयरडेविल एक्‍ट्रेस हुई जूलिया। जिसने दिलों पर राज किया। उसका शादीशुदा प्रोड्यूसर रूसी बिलिमोरिया (सैफ अली खान) उस पर जान छिड़कता है। दोनों बॉर्डर पर हैं। और इन सब में जमादार नवाब मलिक (शाहिद कपूर) भी है, जो जूलिया से बेपनाह मोहब्‍बत करता है।

समीक्षा

रंगून मूवी रिव्‍यु | rangoon movie review in hindi

‘रंगून’ युद्ध की पृष्‍ठभूमि पर लव ट्राएंगल दिखाने का एक महत्‍वाकांक्षी प्रयास है। कैनवास बहुत बड़ा है और सिनेमेटोग्राफी के स्‍तर पर पंकज कुमार ने जबरदस्‍त और बारीक काम किया है। सामने युद्ध का समय है, लेकिन इसके बीच में नाच-गाना है। प्‍यार है। पुराने और नए दौर के संगीत का उम्‍दा मिश्रण है। फिल्‍म में प्‍यार की आग है और साथ ही है साजिश की कहानी।

युद्ध और प्रेम के बीच कुछ अधूरा-सा

kaisi fil hai rangoon

विशाल भारद्वाज ने बतौर डायरेक्‍टर हमें ‘मकबूल’, ‘ओमकारा’ और ‘हैदर’ जैसी फिल्‍में दी हैं। लेकिन इस बार वह और उनका सिनेमाई फ्रेम कहीं-कहीं ठहर सा जाता है। कुछ सीन थकाऊ लगते हैं। डायरेक्‍टर साहब ने इस फिल्‍म में सबकुछ समेटने की कोश‍िश की है। प्‍यार, युद्ध और छल-कपट। लेकिन अंत में दर्शकों के हाथ आता है युद्ध और प्रेम के खेल का कुछ अव्‍यवस्‍थ‍ित सा रूप।

इश्‍क तो है, जुनून कम है

kaisi hai kangna aur shahid ki rangoon

सैफ अली खान ने बेहतरीन काम किया है। शाहिद लाजवाब हैं। कंगना सचमुच की ‘क्‍वीन’ हैं। उनको देखकर यही लगता है कि वाकई उनके लिए दो लोगों के बीच तलवारें खींच सकती हैं। वह रूसी के लिए एक अनमोल जागीर है, जिस पर वह फिदा है। जबकि देशभक्‍त नवाब के लिए वह दिल की धड़कन है। वह उससे सूफी इश्‍क करता है। फिल्‍म में प्रेम के पलों को अच्‍छे तरीके से लिखा गया है, लेकिन फिर भी उसमें जुनून कम दिखता है। शाहिद और कंगना के बीच कई लिप-लॉक सीन हैं, लेकिन वह पर्दे पर आग नहीं लगा पाते।

कुछ तो कमी रह गई…

rangoon movie review in hindi

फिल्‍म में एक डायलॉग है। सैफ एक ब्रिटिश अध‍िकारी से कहते हैं, ‘हम एक्‍टर्स हैं। हमें पता है लोगों को कैसे मनाना है।’ हालांकि ‘रंगून’ के लिए य‍ह बात पूरी तरह सच साबित नहीं होती है। जूलिया से शब्‍द उधार लेकर कहें तो ‘ब्‍लडी हेल’ इस फिल्‍म को और रंगीन बनाया जा सकता था।