Home मूवी रिव्यू

Tubelight Review: उम्मीद जगाने की कोशिश है ‘ट्यूबलाइट’

Updated: Jul 06, 2017 09:52 am
SHARE

ट्यूबलाइट

रेटिंग:

3/5

कास्‍ट:

सलमान खान, सोहेल खान, ओम पुरी, मोहम्मद जीशान आयूब, मातिन रे टांगू, जू जू

डायरेक्‍टर:

कबीर खान

समय:

2 घंटे 16 मिनट

जॉनर:

ड्रामा

लैंग्‍वेज:

हिंदी

समीक्षक:

मीणा अय्यर

1/8कहानी

लक्ष्मण सिंह बिष्ट (सलमान खान) के दिमागी तौर पर कमजोर होने के कारण पोड़सी उसका नाम ‘ट्यूबलाइट’ रख देते हैं। स्पेशल होने के बावजूद, लक्ष्मण एक बात को गांठ बांधकर रखता है। उसका मानना है कि अगर अपने विश्वास को जीवित रखें, तो आप कुछ भी कर सकते हैं। यहां तक एक युद्ध को भी रोक सकते हैं।

2/8समीक्षा

salman tubelight

‘ट्यूबलाइट’ सलमान की उन फिल्मों से हटकर है, जिसमें वह दर्शकों के बड़े समूह को इंटरटेन करते हैं। यहां बॉलीवुड के डार्लिंग स्टार को एक बच्चे तौर पर पेश किया है, जो शर्ट उतारकर अपने बाइसएब्स नहीं दिखाता। अगर इस उम्मीद में फिल्म देखने जा रहे हैं तो पहले अपने विश्वास जगाएं।

3/8हर मुश्किल में अपनाई गांधीगिरी

Salman Khan Says Those Who Order Wars Should Go on Border And Fight News in Hindi

‘ट्यूबलाइट’ ऑलजेंट्रो मोंटेवार्ड द्वारा निर्देशित हॉलीवुड फिल्म ‘लिटल बॉय’ से इंस्पायर्ड है, जिसकी कहानी बड़ी सादगी के साथ कही गई है। कहानी की शुरुआत उत्तर-पूर्वी भारत के बेहद खूबसूरत शहर जगतपुर से होती है। ‘ट्यूबलाइट’ की कहानी उस दौर की है जब भारत और चीन के बीच युद्ध छिड़ा हुआ था। शहर के लोग लक्ष्मण की मासूमियत भरी बेवकूफियों पर हंसते हैं और उसका काफी फायदा उठाते हैं। लक्ष्मण को बन्ने चाचा (ओम पुरी) ने पाला है। उन्होंने उसे हर मुसीबत में गांधीजी का ज्ञान इस्तेमाल करने की सीख दी है।

4/8सिर्फ ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ के लिए!

नारायण (जीशान आयूब) इलाके का एक बदमाश है, जो लक्ष्मण को बिना वजह थप्पड़ मारता रहता है। लक्ष्मण को थप्पड़ की चोट ज्यादा नहीं लगती बल्कि थप्पड़ खाकर हुई बेइज्जती से वह परेशान होता है। उसके लिए चीजें तब थोड़ी सुधरने लगती हैं, जब खूबसूरत लिलिंग (जू जू) और चुलबुला गुओ (मातिन) जगतपुर आते हैं। ये दोनों चीन प्रवासी हैं। साफ पता चलता है कि फिल्म में इनको ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का नारा भुनाने के मकसद से ही लिया गया है।

5/8जबरदस्ती घुसाए गए हैं वॉर सीक्वेंस

war in tubelight

फिल्म के वॉर सीक्वेंस जबरदस्ती घुसाए हुए से लगते हैं और उन्हें देखकर कोई भावुकता नहीं जागती। ऐसा इसलिए क्योंकि ना तो फिल्ममेकर ने इसमें भावुक लेखन को लाने की जहमत उठाई है और ना ही ऐसे कोई मोंटाज रखे हैं, जो झकझोर कर रख दें।

6/8ऐसा लगेगा ‘सत्संग’ देखने पहुंचे है

फिल्म में परिवार, विश्वास और देशभक्ति के मूल्यों पर बात की गई है लेकिन इन सबको लेकर फिल्म दर्शक को कन्विंस करने में नाकामयाब रहती है। सबकुछ इतना ज्यादा अच्छा-अच्छा भर दिया गया है कि आपको लगेगा कि आप सलमान की फिल्म देखने नहीं, बल्कि ‘सत्संग’ में आए हैं।

7/8संगीत और सिनेमोटोग्राफी शानदार

प्रीतम के संगीत ने ‘नाच मेरी जान’ और ‘सजन रेडियो’ को इतना खूबसूरत बनाया है कि मजा आ जाएगा। इसके अलावा असीम मिश्रा का कैमरा वर्क बहुत शानदार है। वहीं फिल्म में शाहरुख खान का कैमियो काफी चर्चा में था। शाहरुख ने इसमें एक जादूगर गो-गो पाशा का महत्वपूर्ण रोल प्ले किया है।

8/8सलमान मचो मैन की छवि को तोड़ते हैं

tubelight emotinal salman

परफॉर्मेंस की बात करें तो, सलमान खुलकर हंसते भी दिखे हैं और रोते भी, जो उनकी माचो मैन की इमेज से बिल्कुल उलट है। जाहिर है कि उन्होंने हैरान कर देने वाली कोई परफॉर्मेंस नहीं दी है, लेकिन अच्छे लगते हैं। सोहेल फिल्म में बहुत गंभीर दिखे हैं, जू जू ने साहसपूर्ण एक्टिंग की है। और हां, छोटे मातिन को देखकर भी आपको मजा आएगा। ओम पुरी साहब का किरदार देखकर आपको याद आएगा कि हमारे सैनिक किस मिट्टी के बने होते हैं।